आज ज़्यादातर बहुमंज़िला इमारतें RCC फ़्रेम हैं: कॉलम, बीम और स्लैब भार उठाते हैं, और दीवारें उनके बीच की जगह भरती हैं। इससे सवाल बदल जाता है। दीवार इमारत को नहीं थामती, इसलिए AAC ब्लॉक और पकी ईंटों के बीच चुनाव वज़न, गर्मी, कारीगरी और फ़्रेम से मिलने की जगह पर दीवार के व्यवहार का है।
दो अलग सामग्रियाँ
पकी मिट्टी की ईंट आग में पकाई गई मिट्टी है: छोटी, ठोस, हर मिस्त्री की जानी-पहचानी, और ऐसे भट्ठों में बनी जिनकी गुणवत्ता एक से दूसरे में बदलती रहती है। AAC ब्लॉक — ऑटोक्लेव्ड एरेटेड कंक्रीट — फ़ैक्टरी में बना उत्पाद है, जो सीमेंट, चूना, फ़्लाई ऐश या रेत और एक एरेटिंग एजेंट से बनता है और भाप के दबाव में पकाया जाता है। यह छोटे-छोटे बंद हवा के छिद्रों से भरा होता है, और इसके लगभग सारे गुण इन्हीं से आते हैं।
AAC ब्लॉक ईंट से कई गुना बड़ा होता है और उतने ही आयतन में लगभग एक-तिहाई वज़न का। दोनों भारतीय मानकों में आते हैं — साधारण पकी ईंटों के लिए IS 1077 और ऑटोक्लेव्ड सेल्युलर कंक्रीट ब्लॉक के लिए IS 2185 (भाग 3) — और सही तरह बने और चिने जाएँ तो दोनों से मज़बूत दीवारें बनती हैं।
वज़न
यह सबसे साफ़ अंतर है। हल्की दीवार अपने नीचे के बीम, कॉलम और नींव पर कम भार डालती है, और बहुमंज़िला फ़्रेम में यह बचत स्ट्रक्चरल डिज़ाइन में ली जा सकती है। यह तभी गिनी जाती है जब स्ट्रक्चरल इंजीनियर उसके हिसाब से डिज़ाइन करे: ईंट के लिए डिज़ाइन हुए फ़्रेम में बाद में AAC लगाने से सिर्फ़ वज़न बचता है, और कुछ नहीं।
अगर AAC लगाना है, तो फ़्रेम डिज़ाइन होने से पहले स्ट्रक्चरल डिज़ाइनर को बताइए, बाद में नहीं।
गर्मी
हवा के छिद्र AAC को ईंट से कहीं बेहतर इन्सुलेटर बनाते हैं। सूरत जैसी गर्म जलवायु में यह पश्चिम की ओर की दीवारों और ऊपरी मंज़िल पर सबसे ज़्यादा मायने रखता है, जहाँ बेहतर इन्सुलेटेड दीवार दोपहर भर कमरों को ठंडा रखती है और एयर कंडीशनिंग का भार घटाती है।
ईंट की ताक़त उल्टी है: थर्मल मास। मोटी ईंट की दीवार गर्मी धीरे सोखती है और धीरे छोड़ती है, जिससे दिन भर का उतार-चढ़ाव बराबर होता है। जो इमारत ज़्यादातर समय एयर-कंडीशन्ड रहती है, उसके लिए इन्सुलेशन आम तौर पर ज़्यादा मायने रखता है; जो प्राकृतिक हवा पर निर्भर है, उसके लिए फ़र्क ब्रोशर में बताए से कम है।
फ़्रेम पर दरारें
AAC दीवारों की सबसे आम शिकायत दरारें हैं, और वे लगभग हमेशा कंक्रीट फ़्रेम से जोड़ पर या लिंटल के साथ होती हैं — ब्लॉकों के बीच से नहीं।
- ऐसा क्यों होता है कंक्रीट और AAC सूखते समय और तापमान बदलने पर अलग-अलग तरह हिलते हैं। जहाँ दोनों मिलते हैं, वहाँ प्लास्टर को दो अलग दिशाओं में हिलती सामग्रियों को जोड़ना पड़ता है, और वह उसी रेखा पर फट जाता है।
- सूखे ब्लॉक AAC नमी खोने पर सिकुड़ता है। यार्ड या बारिश से गीले ब्लॉक लगाए जाएँ तो प्लास्टर के बाद भी सिकुड़ते रहते हैं। इन्हें ज़मीन से ऊपर रखकर, ढककर, इस्तेमाल से पहले सूखने देना चाहिए।
- सही मसाला थिन-बेड एडहेसिव या AAC के लिए उपयुक्त मसाला, ईंट वाला गाढ़ा मसाला नहीं। ब्लॉक से बहुत ज़्यादा सख़्त जोड़ हलचल को दरारों में केंद्रित कर देता है।
- जोड़ों पर जाली प्लास्टर से पहले ब्लॉक और कंक्रीट के हर जोड़ पर लगी जाली की पट्टी हलचल को इतनी चौड़ाई में फैला देती है जिसे प्लास्टर सह सके।
- बीम के नीचे गैप सबसे ऊपरी परत छोटी छोड़कर बाद में भरी जाती है, ताकि दीवार झुकने वाले बीम से कसकर न दबे।
ईंट की दीवारें भी इसी कारण फ़्रेम पर फटती हैं, पर कम बार और कम दिखती हैं। AAC की ज़्यादातर दरारें कारीगरी की समस्या हैं, जिन्हें रोकना सस्ता है और बाद में ठीक करना महँगा।
प्लास्टर, पानी और फ़िक्सिंग
- ईंटों को चिनाई से पहले भिगोना पड़ता है, नहीं तो वे मसाले का पानी खींच लेती हैं। AAC ब्लॉक भिगोने नहीं चाहिए — ज़्यादा से ज़्यादा सतह को नम किया जाता है।
- AAC पानी धीरे-धीरे पर गहराई तक सोखता है। बाहरी दीवारों को इसके लिए बने प्लास्टर और फ़िनिश की ज़रूरत है, और इमारत का जो हिस्सा मानसून की बारिश झेलता है उस पर सबसे ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।
- AAC इतना नरम है कि आसानी से कटता और खाँचा बनता है, जिससे कंड्यूट आसान हो जाते हैं और लापरवाही से खाँचे काटना भी। गहरे खाँचे ब्लॉक की दीवार को ईंट की दीवार से ज़्यादा कमज़ोर करते हैं।
- भारी फ़िक्सिंग — किचन कैबिनेट, वॉटर हीटर, टीवी ब्रैकेट, ग्रिल — के लिए एरेटेड कंक्रीट के लिए बने एंकर चाहिए, या पहले से तय इंसर्ट। AAC में साधारण प्लग भार पड़ने पर निकल सकता है।
कौन-सी उपयुक्त है
कोई भी सामग्री हर हाल में बेहतर नहीं। दोनों अलग-अलग स्थितियों में ठीक बैठती हैं।
- बहुमंज़िला फ़्रेम में, जहाँ वज़न मायने रखता है और ढाँचा उसके हिसाब से डिज़ाइन हुआ है, AAC आम तौर पर समझदारी है।
- दोपहर की धूप झेलने वाली या छत के नीचे की दीवारों के लिए AAC का इन्सुलेशन असली फ़ायदा है।
- बिना फ़्रेम वाली लोड-बेयरिंग इमारत के लिए ईंट पारंपरिक विकल्प है, और AAC वहाँ तभी ठीक है जब स्ट्रक्चरल डिज़ाइन उसके हिसाब से किया गया हो।
- जहाँ साइट के मिस्त्री ईंट अच्छी तरह जानते हैं और AAC कम, वहाँ जोड़ों की डिटेल लिखकर दी जानी चाहिए और जाँची जानी चाहिए, आदत पर नहीं छोड़ी जानी चाहिए।
- बाउंड्री वॉल, प्लिंथ की चिनाई और गीली ज़मीन में बैठी किसी भी चीज़ के लिए ईंट या ठोस कंक्रीट ब्लॉक ज़्यादा सुरक्षित विकल्प हैं।
जो भी चुना जाए, फ़ैसला डिज़ाइन के समय, ढाँचे और प्लास्टर की स्पेसिफ़िकेशन के साथ होना चाहिए — उस दिन नहीं जब पहला ट्रक पहुँचे।